इस लेख में, मैं, आपको दाँतों में भरे जाने वाले विभिन्न प्रकार के पदार्थों के बारे में बताऊंगा | इन पदार्थों को फिलिंग मैटेरियल कहते हैं | 

दाँतों में भरे जाने वाले फिलिंग मैटेरियल कई प्रकार के होते हैं| जैसे कि, सिल्वर फिलिंग, कंपोजिट फीलिंग, ग्लास आयनॉमर सीमेंट, और जिंक ऑक्साइड यूजिनॉल आदि | 

इन फिलिंग मैटेरियल्स में सिल्वर फिलिंग सबसे मजबूत होती है, लेकिन यह दाँतों के रंग से मैच नहीं होती है | सिल्वर फिलिंग में मुख्यतः चांदी होती है |

कंपोजिट फीलिंग में मुख्यतः प्लास्टिक होता है | इस मेटेरियल का उपयोग, जब आगे के दाँतों में कीड़े लग जाते हैं, तब किया जाता है | कंपोजिट फीलिंग मेटेरियल दाँतों के रंग से मैच करते हैं इसलिए इस मटेरियल से फीलिंग करने के बाद व्यक्ति की सुंदरता बढ़ जाती है | कंपोजिट फीलिंग मेटीरियल की आयु 2 साल से ज्यादा नहीं होती है |

ग्लास आयनॉमर सीमेंट का उपयोग मुख्यतः बच्चों के दूध के दांतों में और बुजुर्गों के जड़ों में लगे हुए कीड़े को भरने में किया जाता है | इस पदार्थ की विशेषता यह होती है कि यह जहां पर उपयोग किया जाता है उसके आसपास दाँतों में कीड़ा नहीं लगने देता है | यह पदार्थ ज्यादा मजबूत नहीं होता है | 

जिंक ऑक्साइड यूजिनॉल फीलिंग मटेरियल का उपयोग टेंपरेरी फिलिंग मेटीरियल के रूप में किया जाता है | यदि कभी डेंटिस्ट को यह लगता है कि दाँतों में चांदी या कंपोजिट फीलिंग मेटेरियल का उपयोग करने से भविष्य में रोगी को दर्द हो सकता है तो उस परिस्थिति में जिंक ऑक्साइड यूजिनॉल मेटेरियल का उपयोग किया जाता है | जिंक ऑक्साइड यूजिनॉल मेटेरियल के अंदर यूजिनॉल अर्थात लौंग  का तेल होता है जो दाँतों के दर्द तथा सेंसिटिविटी को कम करता है|

छवि 3: जिंक ऑक्साइड यूजिनॉल फिलिंग मटेरियल प्रदर्शित करती हुई

दाँतों में फिलिंग होने के कितनी देर बाद खाना खाना चाहिए ?

यदि आपके दाँतों में सिल्वर फिलिंग अर्थात चांदी भरी गई है तो आपको 2 घंटे तक कुछ भी नहीं खाना चाहिए | उसके पश्चात आप नरम खाना खा सकते हैं, जैसे खिचड़ी, चावल दाल, और उबले आलू की सब्जी | कंपोजिट फीलिंग होने के उपरांत आप कुछ भी खा सकते हैं, परंतु ध्यान रहे कि कंपोजिट फीलिंग कमजोर होती हैं, अतः बहुत कड़ी चीज जैसे कि कच्चा चना नहीं खाना चाहिए | ग्लास आयनॉमर फिलिंग होने के 2 घंटे बाद बच्चे खाना खा सकते हैं |

दाँतों में भरे हुए किसी भी फिलिंग मेटेरियल की गारंटी की आशा करना व्यर्थ है |  इसका कारण यह है कि फिलिंग होने के बाद भी आपके दांतों में कीड़ा लगने का कारक हमेशा उपस्थित रहेगा | और यह कारक आपके दाँतों में आगे भी कीड़ा लगाएगा | इसके अतिरिक्त आपके मुंह में उपस्थित लार के गुण एवं उसकी मात्रा, आपके खान-पान की आदतें,  एवं अन्य परिस्थितियां भी एक फिलिंग की लाइफ का निर्धारण करती हैं | इन सब कारणों से कोई भी फिलिंग मेैटीरियल बहुत दिनों तक नहीं चल सकता | किसी फिलिंग को ज्यादा समय तक चलाए रखने में आप खुद ही, अपने मुंह की साफ-सफाई को उत्तम तरीके से बनाए रखकर, प्रयत्न कर सकते हैं | अपने मुंह की साफ-सफाई कैसे बनाए रखें, इसके बारे में पढ़ने के लिए कृपया दिए गए लिंक पर क्लिक करें |

इस लेख के अंत में मैं यह बताना चाहूंगा कि किस प्रकार का मैटेरियल दाँतों  में भरा जाएगा, इसका निर्णय मरीज के दाँतों के रोग की अवस्था के अनुसार किया जाता है | अतः जब डेंटिस्ट आपके दाँतों में कोई खास मैटेरियल भरता है तो उसके पीछे उसका कोई उद्देश्य होता है | मरीज को उस फिलिंग मेटीरियल को बदलने का अनुरोध अपने डेंटिस्ट से नहीं करना चाहिए |  परंतु यदि आपको लगता है कि आपके दांतों में कंपोजिट फिलिंग मैटेरियल या चांदी ही भरा जाना चाहिए, तो अपनी इस इच्छा को, अपने डेंटिस्ट से, कारण सहित जरूर बताएं |

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